महाभारत भारत का वह इतिहास है जिसमें कई सारे महान योद्धा व श्री हरि भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण भी शामिल थे । भारत के इतिहास को वेदव्यास मुनि ने किताब के पन्नों में उतारा था । महाभारत गाथा के सभी किरदार हम कुछ ना कुछ सिखाते हैं जिनमें से कुछ किरदार ऐसे हैं जो हमारे मानसपट पर हमेशा के लिए छप जाते हैं । उन्हीं किरदारों में से आज कुछ किरदारों की बात करेंगे जोकि लोगों के दिलों में एक अलग पहचान बनाते हैं ।
- दुर्योधन
दुर्योधन कौरव सेना का आगेवान था । दुर्योधन ही वह व्यक्ति था जो पांडव से युद्ध चाहता था और दुर्योधन की हस्तिनापुर को पाने की लालच और पांडवों के प्रति नफरत ने ही युद्ध के बीज को बोया था । दुर्योधन एक बुरा व्यक्ति होने के साथ एक कुशल गदाधारी योद्धा था । कहां जाता है दुर्योधन इतना भी बुरा व्यक्ति नहीं था किंतु अपने मामा शकुनि के कारण बुरे कार्य करने के लिए प्रेरित होता था ।
- अश्वत्थामा
ऐसे तो अश्वत्थामा भी एक कुशल योद्धा और आचार्य द्रोण का पुत्र था लेकिन अश्वत्थामा को लोग उनको मिले श्राप के कारण याद करते हैं । पांडवों के पुत्रों को नींद में मारने के कारण कृष्ण ने अश्वत्थामा को कलयुग के अंत तक जीवित रहने का श्राप दिया था और इसी श्राप के कारण अश्वत्थामा आज भी जिंदा है ।
- द्रोणाचार्य
द्रोणाचार्य हस्तिनापुर के राजगुरु और अश्वत्थामा के पिता थे । द्रोणाचार्य ने ही पांडव और कौरवो को शस्त्र और शास्त्र विद्या सिखाई थी । उनको खास कर कर्ण के साथ किये गए भेदभाव के कारन याद किया जाता है| जब कर्ण ने उनसे विद्या सिखने की बात की तब द्रोणाचार्य ने कर्ण को विद्या देने से इनकार कर दिया था|
- अभिमन्यु
अभीमन्यु अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र था जो की महाभारत के युद्ध में लड़ने वाला सबसे कम उम्र का योद्धा था| अभिमन्यू को कौरवो ने छल से मारा था । अभिमन्यु को अपनी बहादुरी के लिए याद किया जाता है ।
- द्रोपदी
द्रोपदी द्रुपद राजा की पुत्री और पांच पांडव की पत्नी थी । कहा जाता है महाभारत युद्ध का असली कारण द्रोपदी ही थी क्योंकि द्रोपदी ने अपने महल में दुर्योधन के पानी में गिरने से उसे ''अंधे का पुत्र'' अंधा कहकर मजाक उड़ाया था और इसी वजह से दुर्योधन ने भरी सभा में द्रोपदी का वस्त्रहरण करना चाहा था जिससे महाभारत का युद्ध निश्चित हो चुका था ।
- शकुनी
शकुनी गांधार राज्य के राजा और दुर्योधन के मामा थे । शकुनी वह आदमी था जिसने दुर्योधन को पांडवों के खिलाफ भड़काया था । दुर्योधन इतना भी बुरा व्यक्ति नहीं था लेकिन अपने मामा शकुनि के बहकावे में आकर कुकर्म करता था ।
- पांडव
पूरी कौरव सेना के विरुद्ध पांच पांडव श्री कृष्ण के साथ खड़े थे । पांचो पांडव में युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, सहदेव और नकुल का समावेश होता है जिनमें युधिष्ठिर धर्मराज, भीम गदाधारी व सबसे शक्तिशाली, अर्जुन कुशल धनुर्धर , सहदेव त्रिकाल ज्ञानी और नकुल कुशल योद्धा थे ।
- सहदेव
पांचो पांडव अपने अपने विद्या में कुशल थे लेकिन उनमें से सहदेव अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं । सहदेव को सभी वेदों का ज्ञान था और साथ ही साथ सभी शास्त्र और पुरानो का ज्ञान था| लेकिन उनको लोग अपने त्रिकाल ज्ञान को लेकर याद करते है| सहदेव को तीनो काल भूतकाल, वर्तमान और भविष्य में क्या हो रहा है या क्या होगा उन सब का ज्ञान था लेकिन वो किसीको बताते नहीं थे की आगे क्या होने वाला है|
- विदुर
विदुर एक दासी पुत्र थे । लेकिन विदुर कूटनीति और अर्थशास्त्र के बहुत बड़े ज्ञानी थे । उनमें इतनी काबिलियत थी की वह अकेले ही पूरे राज्य के शासन को चला सकते थे । कृष्ण के बाद सबसे बुद्धिमान व्यक्ति यही थे । इन्होंने कई बार दुर्योधन के षड्यंत्र को नाकाम किया था । विदुर को आज भी लोग अपने विदुर नीति के लिए याद करते हैं ।
- भीष्म
भीष्म गंगा के पुत्र थे| जिनको इच्छामृत्यु का वरदान था| भीष्मने आजीवन ब्रम्हचर्य का पालन किया था| भीष्म ने अपना पूरा जीवन हस्तिनापुर की रक्षा और सेवा में लगा दिया था| भीष्म को अपनी शपथ का पालन करने के लिए याद किया जाता है| एक बार उन्होंने शपथ ले ली तो वह अपने अंत समय तक उसका पालन करते थे|
- कर्ण
कर्ण वैसे तो सबसे बड़े पांडव थे यानी कि वह पांडवों के बड़े भाई थे लेकिन माता कुंती के करण को गंगा नदी में बहा देने के कारण और अगीरथ नामक सारथि के अपने पुत्र के रूप में स्वीकारने के कारण कर्ण को सूत पुत्र के रूप पहचाना गया । अगर एक रूप से देखा जाए तो पांडव और कौरव में कर्ण सबसे बड़े थे तो कायदे से हस्तिनापुर पर उनका अधिकार था लेकिन इस बात से अनजान होने के कारण सभी ने उन्हें तिरस्कार दिया । अपने जीवन में इतने सारे तिरस्कार और कई लोगों से श्राप मिलने के बावजूद भी वह एक श्रेष्ठ योद्धा कहलाए और इतिहास के सबसे बड़े दानी कहलाए । लोग आज भी उनकी महानता की बाते करते थकते नहीं ।
- कृष्ण
पूरे भारत में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो कृष्ण को नहीं जानता । कृष्ण को सभी ईश्वर के रूप में नमन करते हैं । कृष्ण स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार थे । कृष्ण अद्भुत व्यक्तित्व के साथ एक महान पथ दर्शक थे । उनके दिए गए भगवत गीता के उपदेश से वह आज भी लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं । लोग उनकी सिर्फ पूजा ही नहीं करते बल्कि उनसे सच्चे मन से प्रेम भी करते ।
एक बात ध्यान दें के ऊपर दी गई लिस्ट मेरे अपने व्यक्तिगत विचार थे । आपका समय देने के लिए धन्यवाद । आपका दिन मंगलमय हो ।
















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