ईस्ट इंडिया कंपनीका भारत पर असर| Impact of east india company in india| Britisher in india-Part-4



                     जब हम ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन पर जब एक नजर डालते हैं तब हमें यह ख्याल आता हे की भारतका जो सदियों से दुनिया के सभी देशों में गौरव भरा स्थान था वह भारत कंपनी शासन के 100 सालों के अंदर इंग्लैंड के लिए कच्चा माल पैदा करने वाला और कारखानों में तैयार हुए माल के लिए सिर्फ एक बाजार बन के रह गया था ।बंगाल सूतराऊ कपड़े, कच्चा रेशम, चीनी और मलमल की निकास करता था( 1708 से 1756) । लेकिन द्विमुखी शासन पद्धति के बाद बंगालकी चमक दमक कम हो गई ।

   


               कंपनी के अन्यायसे कर लेने की नीति से भारत के किसान कंगाल और कर्जदार बने । अंग्रेज सरकार ने इंग्लैंड का उद्योग विकसाने के लिए भारत के उद्योगोंको अनीति भरे कायदों से कुचल डाला । इससे भारत का कारीगर गरीब और बेरोजगार बना । कंपनी के व्यापारी बंगाल के कारीगरों के पास से कम कीमत में काम करवाते और अगर कारीगर मना करें तो उसे मारने की या जेल की धमकी दी जाती थी ।

                 कंपनी के आने से पहले भारत के गांव स्वावलंबी और समृद्ध हुआ करते थे जो अंग्रेजी शासन की असर से गरीब और पराधीन बने । कंपनी की माल सामान की हेर फेर की जरूरत के कारण मुंबई और थाना के बीच पहली रेलवे और मुंबई, मद्रास और कोलकाता मैं महा बंदर की स्थापना भी हुई ।

     


           ब्रिटिश वही वट के दरमियान वर्तमान पत्रों के विकास से भारतीय प्रजा में विचार, वाणी 

स्वतंत्रता और अपनी आवाज लोगों तक पहुंचाने की भावना जगी । उस वक्त भारत में सती प्रथा और बाल विवाह जैसे कुरिवाज देखने को मिलते थे । अंग्रेजों के संपर्क से राजा राममोहन राय, दुर्गाराम मेहता और बैहरामजी मलबारी जैसे समाज सेवकों ने कुरिवाजो को भारतीय समाज से दूर करवाया । भारत में वही वटी तंत्र अंग्रेजी में होने के कारण अंग्रेजी पढ़े-लिखे लोगों की जरूरत पैदा हुई । परिणाम स्वरूप गवर्नर मेंकोले के प्रयत्न से भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत हुई । चार्ल्स वुड की सलाह से मुंबई, मद्रास और कोलकाता में यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई ।

            



               इस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी की वजह से भारत में कुछ अच्छे तो कुछ बुरे परिणाम निकले लेकिन अच्छे परिणामों के मुकाबले अंग्रेजों की लालच, अन्याय और और अमानवीयता की वजह से बुरे परिणामों की संख्या ज्यादा थी । कंपनी ने इंग्लैंड को समृद्ध बनाने के लिए भारत का भोग लिया जिससे भारत जो पहले ''सोने की चिड़िया'' कहलाता था आज एक गरीब और गुलाम देश बन के रह गया था ।


           


आपका समय देने के लिए धन्यवाद ।

 

 



 image by:-snappygoat

                :-wikimedia commons

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