जाने महान मोढेरा के सूर्यमंदिर के बारे में हिंदी में | मोढेरा के अद्भुत सूर्यमंदिर का सम्पूर्ण ज्ञान | The Sun Temple of Modhera | great sun temple at Gujrat | Historical Place

     

       हमारे देश भारत में कुल 2 सूर्य मंदिर है| एक ओडिशा में कोणार्क सूर्यमंदिर और दूसरा गुजरात में मोढेरा सूर्यमंदिर| आज हम उसी मोढेरा सूर्यमंदिर की बात करने वाले है|जो की अपनी कलाकृति और वास्तु कला के लिए पुरे विश्व में सुप्रसिद्ध है| सूर्य मंदिर गुजरात के पाटन नामक स्थान से 30 किलोमीटर दक्षिण की ओर मोढेरा गॉव में निर्मित है। यह सूर्य मन्दिर विलक्षण स्थापत्य और शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है। इस मंदिर के निर्माण में जोड़ लगाने के लिए कहीं भी चूने का प्रयोग नहीं किया गया है।
 
रचना और कद:-
 

                ईरानी शैली में बने इस मंदिर को सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ई. में दो हिस्सों में बनवाया था। जिसमें पहला हिस्सा गर्भगृह का और दूसरा सभामंडप का है। गर्भगृह में अंदर की लंबाई 51 फुट, 9 इंच और चौड़ाई 25 फुट, 8 इंच है। मंदिर के सभामंडप में कुल 52 स्तंभ हैं। इन स्तंभों पर विभिन्न देवी-देवताओं के चित्रों के अलावा रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बेहतरीन कारीगरी के साथ दिखाया गया है। इन स्तंभों को नीचे की ओर देखने पर वह अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने से वह गोल नजर आते हैं। मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया था कि सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड है जो सूर्यकुंड या रामकुंड के नाम से प्रसिद्ध है।

कलाकृति:-


       इस मंदिर की वास्तुशिल्प कला के उत्कृष्ट उदाहरण मिल जाएंगे। परिसर में कई स्तंभ हैं, जिन पर रामायण और महाभारत काल की चित्रकारी दिख जाएगी। जब इन स्तंभों को नीचे से देखा जाता है तब वह अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने से वह गोल नजर आते हैं।यह मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां खजुराहो जैसी नक्काशी मौजूद है। शिलाओं पर खजुराहो जैसी नक्काशी उकेरी गई। इसलिए, इसे गुजरात का खजुराहो भी कहा जाता है।
     

   बरसात के मौसम में यह मंदिर अद्भुत छटा बिखेरता है। वहीं, दिवाली के समय इसकी भव्यता ​देखी जा सकती है|इस मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया था कि जिसमें सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड स्थित है जिसे लोग सूर्यकुंड या रामकुंड के नाम से जानते हैं।
     पुराणों के अनुसार ये भी बताया गया है कि भगवान श्रीराम ने रावण के संहार के बाद अपने गुरु वशिष्ट को एक ऐसा स्थान बताने के लिए कहा जहां जाकर वह आत्मशुद्धि कर सकें और ब्रह्म हत्या के पाप से भी मुक्‍ति पा सकें | तब गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम को यहीं आने की सलाह दी थी|

मंदिर और मोहमद गजनी:-



        सन 1026 ईसवीं के आसपास गजनी से आये क्रूर आक्रांता ने गुजरात की ओर आक्रमण किया था व कई मंदिर तोड़ लिए थे जिनमे गुजरात का सोमनाथ मंदिर मुख्य था जहाँ उसने पचास हज़ार श्रद्दालुओं की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी।इसी के साथ उसने मोढेरा के सूर्य मंदिर पर भी भीषण आक्रमण किया व लाखो लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

         इसी के साथ उसने संपूर्ण मंदिर का विध्वंस किया व मूर्तियों को खंडित कर दिया। इतना ही नहीं उसने मुख्य मूर्ति को भी खंडित कर दिया व यहाँ से सभी सोना व आभूषण लूटकर अपने साथ ले गया।जल्द ही भीमदेव ने अपना पुनः आधिपत्य स्थापित किया व फिर से मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। हालाँकि मंदिर के अब केवल अवशेष ही बचे थे किंतु जो मंदिर आज हम अपने सामने देखते है व पुनर्निर्मित किया गया था।इसके बाद के राजाओं ने भी मंदिर के निर्माण में अपना योगदान दिया व समय-समय पर यहाँ कई चीज़े जोड़ी गयी जैसे कि मंदिर का नृत्य कक्ष, बरामदे, विभिन्न द्वार इत्यादि।

   


     यह मंदिर अपनी विशेषता के लिए पुरे विश्व में प्रसिद्ध होने के कारण वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है और पुरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है|दोस्तों अगर आप किसी तरह से इस सुन्दर मदिर की मुलाकात ले सकते है तो आपको यही सलाह दूंगा की एक बार इस मंदिर की मुलाकात जरुर लीजिएगा| धन्यवाद|

images:-Bernard Gagnon, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons
          :-Bernard Gagnon, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons
           :-Musafir kanya, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons
          -Manoj Radhakrishnan, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons
          -Vu2sga, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons
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