आजाद हिंद फौज में पकड़े गए सैनिकों के ऊपर राजद्रोह का केस चलाया गया । भूलाभाई देसाई और जवाहरलाल नेहरू सैनिकों की तरफ से लड़े लेकिन ब्रिटिश सरकार ने सैनिकों को सजा देने का फैसला किया जिसका लोगों के द्वारा विरोध होते सैनिकों को सजा देने का निर्णय वापस लेना पड़ा ।

                   इसी बीच सन 1946 मैं नौका विद्रोह हुआ । सरकार के नौका दल में काम करते भारतीयों के साथ भेदभाव हो रहा था । ब्रिटिश सिपाही और भारतीयों को अलग-अलग खाना दिया जाता था जिसमें भारतीय को काफी बुरा खाना मिलता था जिसके कारण नौका दल में विद्रोह शुरू हो गया । धीरे-धीरे यह विद्रोह पूरे देश भर में फैल गया और ब्रिटिश सरकार की सेना में काम करते भारतीय सैनिकों में भी यह विद्रोह की भावना जगी और सेना के अंदर ही अंदर ब्रिटिशर और भारतीयों के बीच लड़ाई झगड़े शुरू हो गए ।

   


           उस वक्त ब्रिटिश सरकार की सेना में ब्रिटिश सिपाहियों के मुकाबले भारतीय सिपाहियों की संख्या ज्यादा थी और अगर यह विद्रोह और बढ़ता गया तो विद्रोह को काबू करना असंभव था क्योंकि उस वक्त दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था जिसमें इंग्लैंड भी शामिल था और इसलिए भारत में अब और ब्रिटिश सैनिक लाना असंभव था । इन सब परेशानियों से तंग आकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली ने यह ऐलान किया की ब्रिटिश सरकार भारत को सारी सत्ता देकर जून 1948 तक भारत से चले जाएंगे ।

             उस वक्त पूरे भारत में हिंदू और मुस्लिम के बीच दंगे हो रहे थे जिसकी नींव खुद अंग्रेजों ने ही रखी थी इसीलिए उस वक्त भारत के वाइसरॉय के तौर पर विवेल की जगह माउंटबेटन को पसंद किया गया । उस वक्त हिंदू और मुस्लिम के बीच हो रहे लड़ाई झगड़े के बीच मोहम्मद अली जिन्ना के द्वारा अलग देश पाकिस्तान की मांग हुई । देश को हो रहे नुकसान को देखकर सरदार पटेल और अन्य कांग्रेस नेताओं को मोहम्मद अली जिन्ना की बात को स्वीकारना ही सही लगा । सरदार पटेल और नेहरू ने गांधी जी को यह बात समझाई की भारत का विभाजन जरूरी है और हालातों को देखकर गांधी जी ने दिल पर पत्थर रखकर भारत के विभाजन को मंजूरी दे दी ।

   


          24 मार्च 1947 को माउंटबेटन ने अपनी कुर्सी संभाली । उनके मतानुसार भारत के विभाजन के अलावा अब और कोई रास्ता नहीं बचा था । सरदार पटेल ने भी इस बात को बढ़ावा दिया क्योंकि अगर ऐसा ना करते तो हिंदू मुस्लिम की लड़ाई और भयानक रूप ले लेती । 3 जून 1947 को माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की अंतिम योजना पेश की जिसे ' माउंटबेटन योजना' कहां गया ।

     


     कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने इस योजना को स्वीकार किया और इस योजना के अनुसार ब्रिटिश पार्लियामेंट ने जुलाई 1947 को हिंद स्वतंत्र धारा पसार की । इस धारा के अनुसार भारत ने पहले गवर्नर जनरल के तौर पर माउंटबेटन को पसंद कीया और पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना को गवर्नर जनरल बनाया गया ।

     


      माउंटबेटन के द्वारा भारत को सत्ता सौंपने की कार्यवाही 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को पूरी की गई । ध्वज स्तंभ से इंग्लैंड के राष्ट्रीय ध्वज को उतारकर भारत के तिरंगे को लहराया गया । भारत को आजादी देते सभी दस्तावेज भारत के पहले हिंदी गवर्नर जनरल चक्रवर्ती सी. राजगोपालाचारी को सौंपे और इसी के साथ भारत को आजादी मिली ।

चारों ओर खुशियों का माहौल था । 15 अगस्त 1947 को आजादी का सूर्योदय हुआ । पूरे देश ने आनंद और उल्लास से पहले स्वतंत्रता दिवस को मनाया । लोगों ने अपने घरों में रंगोलियां बनाई, स्कूल और कॉलेज में मिठाइयां बांटी गई, अनेक क्रांतिवीरोने राहत की सांस ली । चारों ओर खुशियां ही खुशियां थी लेकिन सिर्फ एक व्यक्ति थे जो दुखी थे और वो थे महात्मा गांधी जोकि भारत के विभाजन से शोक में डूबे हुए थे ।

 

 


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