सायमन कमीशन और नेहरु कमिटी| Simon commission and Nehru committee| Britisher in india-Part-11

          


             1920 से 1947 के बीच के वक्त को गांधी युग कहा जाता है । इस वक्त सबसे ज्यादा आंदोलन और सत्याग्रह की लड़ाइयां लड़ी गई । मोंटेंग्यु चेम्सफार्ड ने 1919 में एक नया नियम बनाया जिसके अनुसार भारत में कोई सुधार होता है तो 10 साल बाद उस सुधार के परिणाम और कारण का अवलोकन किया जाए । लेकिन स्वराज पक्ष के बाहर ऊभर ने से देश में जो बदलाव आ रहे थे उनको रोकने के लिए 10 साल की जगह 8 साल में ही यानी कि 1927 में साइमन कमीशन की रचना की गई ।

       


 

                 जॉन साइमन की आगेवानी तले सात सभ्य को साइमन कमीशन के लिए चुना गया । साइमन कमीशन के सभी सभ्य अंग्रेज थे । भारतीयों की समस्याओं को एक भारतीय ही समझ सकता है इस विचार से साइमन कमीशन का विरोध होने लगा । जिसके विरोध मे सरकार ने दमन निति का सहारा लिया । साइमन कमीशन के भारत में आते ही जगह जगह पर लोगों ने रेलिया, हड़ताल, साइमन गो बैक के नारे लगाए । लाहौर मे आनदोलन कि आगेवानि करते लाला लजपत राय पर सरकार के द्वारा लाठीचार्ज करते लाला लजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए और कुछ वक्त बाद अस्पताल में इलाज करते हुए उनकी मृत्यु हो गई । लाला लाजपत राय के अवसान के बाद लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की क्रांतिकारियों ने हत्या कर दी ।

    


                  साइमन कमीशन के बहिष्कार होते हिंदी वजीर बरकन हेड ने धारा सभा में यह बात रखी की अगर भारत के नेता एक अनुकूल संविधान बना कर दे तो ब्रिटिश सरकार उसके बारे में सोचेगी । इस बात को चुनौती समझ के हिंदी राष्ट्रीय महासभा ने मोतीलाल नेहरू के प्रमुख पद पर नेहरू कमिटी की रचना की । जो अहवाल दिया गया उस अहवाल को नेहरु अहवाल के नाम से जाना गया जिसमें स्थानिक स्वराज्य, स्वतंत्र न्याय तंत्र, मूलभूत अधिकार, मताधिकार इत्यादि बाबतो का समावेश किया गया । लेकिन अंग्रेज सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया ।

    


              उस वक्त हिंदी राष्ट्रीय महासभा में जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेता सक्रिय हुए । जो पूर्ण स्वराज चाहते थे वे सभी सनस्थानिक स्वराज्य से नाखुश थे । परिणाम स्वरूप लाहौर के रावी नदी के तट पर जवाहरलाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज का ठराव पसार किया ।

  


            उसके बाद 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता की शपथ लेकर प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिन के तौर पर मनाया गया । इसीलिए आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी के दिन प्रजासत्ताक दिन मनाया जाता है ।

 

 


images by:- Prakash pandey07, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons

                :-Prime Minister's Office, Government of India, CC BY-SA 2.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0>, via Wikimedia Commons

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