गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरुद्ध सत्याग्रह की लड़ाई जीतने के बाद 1915 में भारत वापस आए । उनके राजकीय गुरु गोपाल कृष्ण गोखले और आध्यात्मिक गुरु श्रीमद राजचंद्र से उन्होंने प्रेरणा ली । गांधी जी ने सबसे पहले भारत में आकर भारत के कई प्रदेशों में प्रवास करके भारत के जीवन को जानने की कोशिश की । हिंदुस्तान में गरीबी का मूल कारण अंग्रेज सरकार थी यह जानने को मिला । उन्होंने तभी ही यह तय कर लिया था कि वह हिंदुस्तान में से ब्रिटिश साम्राज्य को भारत में हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर देंगे ।
ब्रिटिश सरकार ने इंग्लैंड के कायदा अध्यक्ष रोलेट के नाम से ' रोलेट एक्ट'की 1919 रचना की । यह कायदा क्रांतिकारियों और राष्ट्रीय वादियों को खत्म करने के इरादे से बनाया गया था । क्योंकि यह कायदा व्यक्ति स्वतंत्र और वाणी स्वतंत्रता को खत्म कर रहे था । इस कायदे के अनुसार कोई भी शंकास्पद व्यक्ति को गिरफ्तार करते बिना किसी मुकदमे के कई दिनों तक जेल में रखा जा सकता था । इसीलिए गांधी जी ने इस कायदे को ' काला कायदा' नाम दिया । मोतीलाल नेहरू के मत से यह कायदा दलील, अपील और वकीलात का भारत हक छीन रहा था ।
इस कायदे से ब्रिटिश सरकार के हाथ किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए खुले हो गए थे । इस वजह से कई सारे नेता और प्रजा ने इस कायदे का जमकर विरोध किया । गांधीजी और कई सारे नेता दिल्ली में इस कायदे के विरुद्ध आंदोलन कर रहे थे । इस वजह से दिल्ली में गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया । साथ ही साथ पंजाब में विरोध कर रहे डॉ.सत्यपाल और डॉ.कीचलूं को गिरफ्तार कर लिया गया ।
सत्यपाल और किचलू पंजाब में लोकप्रिय नेता होने के कारण उनके गिरफ्तारी के विरोध में पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया । इस बात का पता वहां के जनरल ओडोनिल डायर को पता चलते वह लश्करी सैनिकों को लेकर जलियांवाला बाग पहुंचा ।
वहां पहुंचते ही डायर ने लोगों को बिना कोई चेतावनी दीये ही सैनिकों को गोलियां चलाने का आदेश दे दिया । सैनिकों ने चारों और गोलियां चलाना शुरू कर दिया और उनके रास्ते में जो भी आता वह मारा जाता । जलियांवाला बाग की दिवारे बहुत ऊँची थी इसलिए लोग बाग से भाग नहीं सकते थे । इस हत्याकांड में बहुत सी जाने गई ।
अंग्रेज सरकार के मुताबिक जलियांवाला बाग में 379 लोग मर गए और 1200 लोग घायल हुए । लेकिन उस वक्त कांग्रेस की की गई गिनती के मुताबिक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी । ब्रिटिश सरकार के द्वारा इस घटना की जांच करने आए ' हंटर कमीशन' ने जनरल डायर का बचाव करते इसे एक प्रामाणिक गलती बताया ।
दूसरी तरफ जब जनरल डायर ने इंग्लैंड में वापसी की तब उसे इस काम के लिए 2000 पाउंड का इनाम और एक तलवार देकर उसका सम्मान किया गया । इस बात से भारत के लोगों में और भी गुस्सा उठा । जब इस बात का पता जेल में बैठे गांधीजी को चला तब उन्हें यह पता चला अंग्रेज सरकार सिर्फ अन्याय ही नहीं बल्कि और मानवीयता का प्रतीक है । जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद भारत के लोगों में एकता बढ़ी और यह एकत आगे जाकर एक बड़े आंदोलन में रूपांतरित हुई ।
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