बंगाल विभाजन और मुस्लिम लीग| Partition of bengal and Muslim league| British india-Part-6

 


         ‘विभाजन और राज’ ये शब्द तो आपने सुने ही होगे|इसीकी मदद से ही अंग्रेज अपना अधिपत्य भारत में टिका पाए थे और इसी सूत्र को केंद्र में रखकर ब्रिटिश सत्ता ने बंगाल और हिन्दू-मुस्लिम को दो हिस्सों में बांटा था|

         नमस्ते दोस्तों में आपका दोस्त विवेक|ब्रिटिश शासन के समय बंगाल एक बोहोत बड़ा प्रान्त था|उनमे आज का बंगाल,बिहार और ओर्रिसा आते थे|भारत में बंगाल राष्ट्रिय चेतना का केंद्रबिंदु था|सभी आन्दोलन के विचार और वेग बंगाल से ही मिलते थे|सन 1857 की क्रान्ति में बंगाल के हिन्दू और मुस्लिम एक साथ अंग्रेजो के खिलाफ लड़े थे|हिन्दू और मुस्लिम की एकता देखके अंग्रेज सरकार खोफ खाती थी|इसीलिए उन्होंने ‘विभाजन करो और राज करो की निति अपनाई|

·      मुस्लिम लीग:-

         अंग्रेज हिन्दू और मुस्लिम के बिच दरार डालना चाहते थे|जिससे की उनकी ताकत आधी हो जाए और उन्हें हराना आसान हो जाए|इसलिए उस वक्त के वाइसरॉय मिन्टो और हिंदी वजीर जॉन मोर्ले ने साथ मिलकर मुस्लिमो के उच्च वर्ग की तरफदारी करनी शुरू करदी|अगल और उच्च अधिकारों और मांगो को देने के लिए अलग मुस्लिम संगठन की रचना कराने के लिए मुस्लिमो के एक बड़े वर्ग को समाजाने में अंग्रेज सफल रहे|

          इसके परिणामस्वरुप सन 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई|इस संस्था की स्थापना में आगाखान,ढाका के नवाब सलिमुल्लाखान और वाइसरॉय मिन्टो की बोहोत बड़ी भूमिका रही|मुस्लिम कोंग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में हाजिर ना रह सके इसलिए मुस्लिम लीग का वार्षिक अधिवेशन भी उसी दिन रखा जाता था|इस तरह अलग अधिपत्य मुस्लिम भाइओ की नहीं बल्कि अंग्रेजो की कूटनीति थी|

·       बंग-भंग आन्दोलन:-

          वाइसरॉय कर्ज़न(1905) के द्वारा बड़े से बंगाल प्रांत को वहीवट की क्षमता बढाने के बहाने से पूर्व बंगाल और पश्चिम बंगाल इस तरह दो हिस्सों में बाँट दिया|एसा करने का सिर्फ एक ही कारण था की लोगो की एकता को तोडा जाय और उनकी ताकत आधी की जाए|

           बंगाल के विभाजन का उग्र विरोध शुरू हो गया|16 अक्टोबर 1905 को बंगाल विभाजन का अमल किया गया| उस दिन को बंगाल में ‘राष्ट्रिय शोक दिन के तौर पर मनाया गया| उस दिन सभी विदेशी माल का बहिष्कार और स्वदेशी माल अपनाने का एलान किया गया|सिर्फ बंगाल ही नहीं परन्तु पुरे भारत में राष्ट्रवाद की आग जली थी|उस दिन पुरे बंगाल में हिन्दू और मुस्लिमो ने एक दुसरे के हाथ पर राखी बाँधी थी और अंग्रेजो को एकता के दर्शन करवाए थे|इस आन्दोलन को ‘बंग-भंग आन्दोलन कहा गया|

  


 


        इस आन्दोलन से भारत को बोहोत लाभ हुआ| एक तरफ भारत के कारीगरों को फिरसे काम मिलना शुरू हो गया और उनका व्यापार फिरसे शुरू हो गया तो दूसरी तरफ इंग्लेंड के व्यापार को बोहोत बड़ा नुकसान हुआ|मेंचेंस्टर से आता कपड़ा बंद हो गया|इंग्लेंड से आते जूते,सिगार,चीनी इत्यादि की आयात कम हो गयी|स्वदेशी कारखाने फिर से शुरू हो गए|एक ख़ुशी की लहर सी छा गयी थी|

           इस आन्दोलन की गूंज ब्रिटिश पार्लमेंट तक सुनाई दी|आखिर में पार्लमेंट ने फिरसे विचारणा करके 6 साल बाद सन 1911 में बंगाल विभाजन को रद कर दिया|

           यह एक ऐतिहासिक जीत थी|इससे भारतीयों की ताकत और बढ़ गयी| उनके हौंसले और बुलंद होते गए जोकि आगे जाके आज़ादी के रूप में बाहर निकले|

         आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद|

 


images by:-rnrctg, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons

                -XrysD, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons

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