दांडी यात्रा| Dandi March| Mahatma gandhi| Britisher in India-Part-12

       


              नमक जिसकी हमें रोजाना जरूरत रहती है और यह बहुत सस्ता होने के कारण गरीब से गरीब परिवार भी इसे इस्तेमाल कर सकता है । लेकिन क्या हो अगर इसी नमक के दाम आसमान छूने लगे जोकि हमारी रोजाना जरूरत है । ऐसा ही हुआ था अंग्रेजों के समय मे । जब अंग्रेजों ने देखा कि भारत के लोग हर रोज दिन में दो वक्त खाने में नमक का इस्तेमाल करते हैं तब उन्होंने ज्यादा लाभ कमाने के लिए नमक के ऊपर हद से ज्यादा कर लगा दिया और अंग्रेज व्यापारियों के अलावा अगर कोई नमक इकट्ठा करता या बेचता है तो उस व्यक्ति को 6 महीने की जेल हो सकती है ऐसा नियम बना दिया ।

        


                  जब गांधी जी को इस बात का पता चला तब वे अंग्रेज सरकार की ईस अन्याय नीति से बहुत ही नाराज हुए और उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन का निर्णय किया जिसमें वे नमक कानून को तोडेंगे । इस आंदोलन के भाग रूप उन्होंने गुजरात के दांडी गांव के समुद्र तट पर जाके नमक कानून को तोड़ने का निर्णय किया । 11 मार्च 1930 की शाम को आश्रम में हजारों लोगों की जनसभा को सत्याग्रह का उपदेश दिया । अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930 की सुबह '' वैष्णव जन तो तेने रे कहिए'' भजन गाया गया जोकि गांधी जी का प्रिय भजन था ।

    



              12 मार्च 1930 की सुबह दांडी यात्रा की शुरुआत हुई । इस यात्रा में गांधी जी के नेतृत्व नीचे सरोजिनी नायडू, महादेव भाई देसाई तथा अन्य बड़े नेताओं ने भाग लिया । अहमदाबाद से दांडी का अंतर 370 किलोमीटर था । दांडी यात्रा में असलाली, बरेजा, नडियाद, बोरियावी, रास, जम्बूसर, भरूच, सूरत, नवसारी जैसे छोटे-मोटे नगर मैं गांधीजी सभा बिठा के सविनय कानून भंग के बारे में समझाते । 29 मार्च 1930 को एक संबोधन में कहां की '' कौवे कुत्ते की मौत मरूंगा लेकिन जब तक स्वराज नहीं मिलेगा तब तक आश्रम में वापस नहीं जाऊंगा''

   


 


                जिस जिस जगह से यात्रा जाने वाली होती वहां के लोग उन रास्तों को साफ और स्वच्छ बनाते और कुछ लोग यात्रा में साथ जुड़ जाते हैं । गांधीजी और उनके साथी 24 दिन की यात्रा के बाद 5 अप्रैल 1930 को दांडी पर पहुंचे । 6 अप्रैल 1930 की सुबह 6:30 बजे समुद्र तट पर जमे हुए नमक में से गांधी जी ने मुट्ठी भर नमक लिया और नमक कानून का उल्लंघन किया । साथ में उन्होंने यह भी कहा ''मैंने नमक का कानून तोड़ दिया है''

     


                 श्री महादेव भाई देसाई ने दांडी यात्रा की '' महाभिनिष्क्रमण'' के साथ तुलना की । दुनिया भर के पत्रकारों ने इस घटना  को अपनी आंखों से देखा और अपने वर्तमान पत्रों में इस घटना को और फोटोग्राफ्स को प्रकाशित किया । पूरे देश में सविनय कानून भंग की चर्चाए होने लगी |सरकार के द्वारा आंदोलन को रोकने के लिए लाठीमार, गिरफ्तारी, गोलीबारी जेसी प्रवृत्तिया अपनाई लेकिन इससे आंदोलन में कोई कमी नहीं आई |

 


images by:- Multiple Authors Goa University, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons

                 :-Camaal Mustafa Sikan…, CC BY 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by/3.0>, via Wikimedia Commons

                 -Buete, CC BY-SA 4.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0>, via Wikimedia Commons

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