हिन्द छोडो आंदोलन | Quit India movement | Britisher in India-Part-13

           


              भारत को किस तरह का संविधान देना चाहिए इसके ऊपर चर्चा करने के लिए गोलमेज परिषद का आयोजन किया गया । नवंबर 1930 को लंदन में पहली परिषद बुलाई गई लेकिन कांग्रेस की गैर हाजिरी के कारण यह परिषद नाकाम गई । इसलिए कांग्रेस को मनाने के लिए गांधीजी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ जिसमें नमक का कानून मुख्य मुद्दा रहा । दूसरी परिषद में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर सिर्फ गांधीजी हाजिर रहे । वहां ब्रिटिश पक्ष ने संविधान बनाने के लिए अलग-अलग धर्म के लोगों के बंटवारे की बात सामने रखी जिससे गांधीजी निराश होकर वापस लौट आए और यह परिषद भी नाकाम गई ।

   


                विश्वयुद्ध में बदलाए संजोगो को को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस समितिने व्यक्तिगत सत्याग्रह को बंद करने का निर्णय लिया । ब्रिटिश सरकार की दरखास्त और बातों से साफ दिख रहा था की वह लोग सत्ता छोड़ना नहीं चाहते थे और बस बातों में फंसा कर भारत की प्रजा को बेवकूफ बना रहे थे । इस बात से भारत के लोगों में हताशा और क्रोध भरा हुआ था । गांधी जी ने प्रजा की निराशा दूर करते हुए लोगों को एक आखरी लड़ाई के लिए तैयार किया ।

     


               मुंबई में कांग्रेस की बैठक में गांधी जी के नेतृत्व तले 8 अगस्त 1942 की रात को ' हिंदी छोड़ो' आंदोलन की नींव रखी । दूसरे दिन गांधीजी, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद उपरांत अन्य कांग्रेस के नेताओं ने आंदोलन की शुरुआत की जिसकी अंग्रेजों को भनक लगते उन्होंने सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और वर्तमान पत्र पर प्रतिबंध लगा दिया । सभी नेताओं की गिरफ्तारी के कारण देश के सभी शहरों में तथा गांव में एकाएक हड़ताल शुरू हो गई । उनका नारा था '' करेंगे या मरेंगे''

       



          देश के गांव में और शहरों में किसान, मजदूर, विद्यार्थी, व्यापारी, शिक्षकों तथा स्त्रियों ने आंदोलन में मुख्य भूमिका बजाइ । मजदूरों ने सभी कारखानों में ताले लगा दीए । जमशेदपुर के लोहे के कारखाने तथा मुंबई और मद्रास की कपड़ों की मीलों में हड़ताल शुरू हुई । अहमदाबाद की कपड़ों की 70 मिलो में 140000 मजदूरों ने 105 दिनों की शांत और अपूर्व हड़ताल की । स्कूल और कॉलेजों में ताले लगा दिए गए और अहमदाबाद की बाजार 3 महीनों के लिए बंद रहे ।

          


       देश में चारों ओर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत और हिंसात्मक घटनाएं घटने लगी । देश में शुरुआत में शांतिपूर्ण हड़ताल हुई लेकिन उसके विरोध में ब्रिटिश सरकार ने दमन नीति अपनाई । इसलिए लोगों में गुस्सा बढ़ते तार, टेलीफोन, रेलवे लाइन, सरकारी मकान, पोस्ट ऑफिस, पुलिस स्टेशन जैसी सरकारी मिलकतो को तोड़ने और लूटने की घटनाएं सामने आने लगी । कुछ इलाकों में लोगों ने बम का भी उपयोग किया जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को हुआ ।



                  आंदोलन को रोकने के लिए सरकार के द्वारा 70000 से ज्यादा लोगों को जेल में डाला गया, 1028 लोगों ने अपनी जान गवाई और 3200 लोग घायल हुए । लेकिन आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा था । इस आंदोलन को देखते हुए ब्रिटिश सरकार को भी यह अंदेशा हो गया था की अब उनका राज ज्यादा समय तक नहीं रहेगा । इस आंदोलन के कुछ सालों बाद ही भारत को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई ।

आपका समय देने के लिए धन्यवाद ।

 


images by:-Multiple Authors, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons

                  :-Multiple Authors Goa University, CC BY-SA 3.0 <https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0>, via Wikimedia Commons


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