भारत में ब्रिटिश सत्ता का उदय| Rise of british rule in India| Britisher in india-Part-1

                    





 भारत प्राचीन समयसे अपनी आर्थिकता,आध्यात्मिकता और संस्कृति के लिए पुरे विश्वमें प्रचलित हे| इससे आकर्षित होकर विश्व के कई देशोमेसे बोहोतसी प्रजाए भारत में रहने अथवा व्यापार के हेतु से आती| प्राचीन समय से भारत के गरम मसाले,मलमल,रेशम के कापड इत्यादि की यूरोप के देशोमे मांग थी|भारत और यूरोप के बीच जो व्यापार का मार्ग था उसके बीच तुर्कस्तान में स्थित इस्ताम्बुल था|

सन 1453 तुर्क के शासको ने इस्ताम्बुल को जीत लिया जिसे उस वक्त कोंस्तेंतिनोपाल कहते थे| इससे यूरोप के लिए भारत आने का मार्ग बंद हो गया,जो की उस वक्त एक लोता मार्ग था भारत आने का| यूरोप के ठंडे मोसम में जीने के लिए भारत के गरम मसालों की बोहोत जरूरत थी|इसीलिए उन्हें एक नए मार्ग की जरूरत थी जो यूरोप को भारतसे जोड़ सके|

उस वक्त पोर्तुगल के राजा प्रिंस हेनरी थे| जिनकी प्रेरणा के निचे बोहोतसे साहसवीरो ने भारत आने के जलमार्ग की खोज शुरू की| उनमे से एक बार्थोलोम्यु दयाज़ नेकेप ऑफ़ गुड हॉप भूशिर की खोज की थी|





क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने स्पेंन के राजा की आर्थिक मदद से नया जलमार्ग खोजने की यात्रा शुरू की| उस यात्रा में सन 1492 में एटलेंटिक समुद्र में आये वर्त्तमान वेस्ट इंडीज़ टापू की खोज हुई| कोलंबस अपनी पूरी जिंदगी इसी विश्वास के साथ जिया की उसने भारत की खोज की हे लेकिन असल में उसने एक दुसरे ही प्रदेश की खोज की थी| इस बात को अमेरिगो वेस्प्युची ने स्पष्ट किया था इसीलिए इस नए प्रदेश को अमेरिका नाम से जाना गया|

पोर्तुगीज नाविक वास्को गामा ने भारत आने के व्यापार की खोज की थी(सन 1498)| भारतीय खलासी की मदद से वो भारत के पश्चिम तट पर स्थित कालीकट बंदर पहोचा| वहा के राजा जामोरिन ने उनका स्वागत करके उन्हें राज्य में व्यापार करने की छुट दे दी| यह घटना बोहोत महत्वपुर्ण थी| इसी की वजह से यूरोपवासियो के लिए भारत आने के दरवाजे खुल गए थे|

भारत आने के जलमार्ग की खोज के बाद भारतमे व्यापार करने के लिए सबसे पहले पोर्तुगीज प्रजा आई| व्यापार बढ़ता रहा| सो सालोमें पोर्तुगिज़ोने दिव,दमण,गोवा,कोचीन और मलाक्का अपने नियंत्रण में कर दिए| पोर्तुगिजो को व्यापार में मिली सफलता से प्रेरित होकर होलेन्ड की डच और डेनमार्क की डेनिश प्रजा भारतमे व्यापार करने के लिए आई| इंग्लेंड के व्यापारियों ने भारत के साथ व्यापार करने के लिए ‘‘ईस्ट इंडिया कंपनी’’ की स्थापना की| सन 1600 में इंग्लेंड की रानी एलिज़ाबेथ ने कंपनी को पूर्व के देशो के साथ व्यापार करने की मंजूरी दे दी| सन 1608में कंपनी का पहेला जहाज कप्तान विलियम होकीन्स की आगेवानी तले सूरत पहोचा| वहा पहले उन्हें पोर्तुगिजो के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन बादमे मुग़ल बादशाह जहाँगीर की मंजूरी मिलते सूरत में उन्होंने व्यापार की शुरुआत की| सन 1613 में सूरत में उनका पहला व्यापारी मथक बना| समय के साथ कंपनी दक्षिण और पूर्व की ओर बढ़ी| जहा उन्होंने आंध्र प्रदेश,चेन्नई और कोल्कात्तामे व्यापारी मथक बनाए| सन 1687 में मुंबई कंपनी का केंद्र मथक बना|



image by:- Wikimedia Commons

Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ